मिसालै दी ही नहीं जाती बनाई भी जाती हैं

मिसालै दी ही नहीं जाती बनाई भी जाती हैं

चरखारी महोबा 13 अक्टूबर।

 आज के दौर में जब दहेज रूपी दानव सुरसा के विकराल मुंह की तरह निरंतर बढ़ते हुए समूचे समाज को लीलने को तैयार हो ऐसे में छतरपुर निवासी अरविन्द द्विवेदी व उनके इकलोते पुत्र सृजन द्विवेदी ने समाज को ऐसा संदेश दिया है जो अनुकरणीय तो है ही, साथ ही ऐसी मिसाल कायम करने वाले लोगों का वंदन और अभिनंदन करने का भी दिल करता है’ बताते चलें कि स्वतन्त्रता सैनानी स्व० दादा श्याम बिहारी चौबे के पुत्र विपिन बिहारी चौबे की पुत्री अंशिका चौबे का विवाह छतरपुर निवासी विद्युत विभाग छतरपुर में कार्यालय अधीक्षक पद पर कार्यरत रहे अरविन्द द्विवेदी निवासी सरवई के पुत्र सृजन द्विवेदी जो सहायक प्रबन्धक, यूनियन बैंक आफ इण्डिया मैं कार्यरत हैं के साथ तय हुआ। विवाह तय होने के दौरान ही कन्या के पिता द्वारा दहेज के सम्बन्ध में चर्चा की लेकिन वर के पिता ने दहेज पर कोई चर्चा न करते हुए केवल लड़की देने की बात कही , जब लड़की के पिता ने सगाई के दौरान अपने सामर्थ्य के अनुसार रूपया की थैली भेंट की लेकिन लड़के ने सगुन के रूप में थाली मे रखे चन्द चांदी के सिक्के उठाए और रूपयों की थैली वापस करते हुए कहा कि आपने बेटी दे दी है यह क्या कम है। लड़की के पिता विपिन बिहारी चौबे ने जब रूपया वर् के पिता अरविन्द द्विवेदी को देना चाहा तो उन्होंने भी रूपया लेने से मना कर दिया और कहा कि मैंने एक होनहार बेटी से रिश्ता तय किया है रूपयों से नहीं किया और न ही मुझे शादी में दहेज की जरूरत है। मेरा एक ही बेटा है और इतना कमा लेता है कि बहू को खुश रख लेगा। इतना सुनते ही बेटी के पिता बिपिन बिहारी चौबे की आंखें प्रेम से छल छला आई। उनके साथ ही शालीमार गार्डन महोबा में मोके पर मौजूद डॉ० उमाशंकर तिवारी’ डॉ० सुरेश खरे, डॉ० अजिर बिहारी चौबे’ जिलाध्यक्ष भाजपा जितेन्द्र सिंह सेंगर,’ शिव कुमार गोस्वामी’ कैलाश गोस्वामी’ तहसहीलदार महोबा बालकृष्ण सिंह’ नायब तहसीलदार कबरई’ डा० पंकज,’ लक्ष्मण प्रसाद परसारिया कानूनगो, विजय बहादुर सिह परिहार ने भी वर’ एवं वर के पिता की सराहना की तथा समाज को एक बड़ा संदेश देने पर आभार व्यक्त किया।

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