साइबर अलर्ट: फ्री ट्रायल और ₹1 सब्सक्रिप्शन के झांसे में न फंसे किसान, हर माह खाते से कट रहे पैसे
विशेष रिपोर्ट।
मोबाइल ऐप पर 3 से 7 दिन के फ्री ट्रायल या मात्र ₹1 में सब्सक्रिप्शन का ऑफर देखकर ‘आई एग्री’ करने वाले उपभोक्ताओं के खाते से हर माह ऑटो डेबिट के जरिए रकम कटने के मामले सामने आ रहे हैं। अब यह खतरा किसानों तक भी पहुंच रहा है, जो खेती से जुड़ी जानकारी, मौसम अपडेट, बीज-खाद सलाह या मार्केट रेट देखने के लिए ऐप डाउनलोड करते हैं।

कैसे हो रहा है खेल?
सोशल मीडिया या प्ले स्टोर पर विज्ञापन के जरिए किसानों को “3 दिन फ्री ट्रायल” या “₹1 में प्रीमियम सेवा” का लालच दिया जाता है। ट्रायल खत्म होते ही बिना अलग सूचना के हर महीने ₹499, ₹799 या ₹899 तक की राशि खाते से कटनी शुरू हो जाती है। कई मामलों में ऐप डिलीट करने के बाद भी कटौती जारी रहती है, क्योंकि बैंक स्तर पर ऑटो-पे/NACH सक्रिय रहता है।
किसानों पर असर
ग्रामीण क्षेत्रों में कई किसान डिजिटल भुगतान और शर्तों को पूरी तरह पढ़े बिना “I Agree” कर देते हैं। छोटे किसानों के लिए हर महीने की अनचाही कटौती आर्थिक बोझ बन रही है। कुछ किसानों ने शिकायत की है कि बैंक और साइबर हेल्पलाइन के चक्कर लगाने के बाद भी रकम वापसी में दिक्कत आती है।
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क्या करें किसान?
बैंक स्टेटमेंट नियमित जांचें – देखें कटौती किस माध्यम (UPI, डेबिट/क्रेडिट कार्ड, NACH) से हो रही है।
UPI ऑटो-पे/NACH बंद करें – अपने बैंक या UPI ऐप में जाकर सक्रिय ऑटो डेबिट रद्द करें।
नेट बैंकिंग में स्टैंडिंग इंस्ट्रक्शन चेक करें – संदिग्ध सब्सक्रिप्शन तुरंत बंद करें।
कार्ड से जुड़ा पेमेंट हो तो इंटरनेशनल/रिकरिंग पेमेंट अस्थायी रूप से बंद करें।
साइबर शिकायत दर्ज करें – 1930 (नेशनल साइबर हेल्पलाइन) पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत करें।
अनजाने ऐप इंस्टॉल न करें और शर्तें (Terms & Conditions) पढ़े बिना “Agree” न करें।
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विशेषज्ञ की सलाह
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि ऐप डिलीट करना समाधान नहीं है। असली नियंत्रण बैंक या पेमेंट प्लेटफॉर्म स्तर पर होता है। इसलिए भुगतान अनुमति (mandate) को रद्द करना जरूरी है।
अपील: किसान भाई-बहन डिजिटल सुविधा का लाभ लें, लेकिन सतर्क रहें। किसी भी ऑफर को स्वीकार करने से पहले उसकी शर्तें जरूर पढ़ें और जरूरत न हो तो प्रीमियम सेवा से बचें।




