महोबा में आरटीओ विभाग पर गंभीर आरोप, ट्रिपर मालिक ने डीएम से लगाई गुहार
मिस्त्री की दुकान पर खड़े वाहन की चाबी छीनकर ले जाने का आरोप, एंट्री के नाम पर कथित वसूली की निष्पक्ष जांच की मांग
महोबा। जनपद में परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर एक ट्रिपर मालिक ने गंभीर आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी से शिकायत की है। छजमनपुरा निवासी दीपेंद्र तिवारी ने एआरटीओ दयाशंकर और उनके कथित चालक मकबूल के खिलाफ प्रार्थना पत्र देकर कार्रवाई की मांग की है। शिकायतकर्ता ने वाहन की चाबी छीनकर ले जाने, धमकी देने और वाहनों से कथित तौर पर एंट्री के नाम पर रकम वसूलने के आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित विभाग का पक्ष सामने आना बाकी है।
मिस्त्री की दुकान पर खड़ा था ट्रिपर
दीपेंद्र तिवारी के मुताबिक, उनका 14 टायर वाला ट्रिपर इंजन खराब होने के कारण पिछले करीब एक महीने से मिस्त्री की दुकान पर मरम्मत के लिए खड़ा था। आरोप है कि इसी दौरान एआरटीओ दयाशंकर वहां पहुंचे और चालक से कथित तौर पर चाबी लेकर वाहन को अपने चालक के माध्यम से वहां से ले गए। वाहन के कागजात पूरे नहीं होने की बात कहकर कार्रवाई किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि जब वाहन मरम्मत के लिए खड़ा था, तो उसे किन परिस्थितियों में ले जाया गया और कार्रवाई के लिए कौन-सा नियम लागू किया गया? इन सवालों का जवाब वाहन की स्थिति और विभागीय अभिलेखों की जांच से ही स्पष्ट हो सकेगा।
एंट्री के नाम पर वसूली का आरोप

शिकायत में कबरई क्षेत्र से निकलने वाले वाहनों से कथित वसूली का मामला भी उठाया गया है। दीपेंद्र तिवारी ने आरोप लगाया कि वाहनों को चलने देने के नाम पर पांच हजार रुपये, स्लीपर बसों से 12 हजार रुपये प्रतिमाह और सीमा पार से आने वाले बालू लदे वाहनों से आठ हजार रुपये प्रतिमाह एंट्री के रूप में लिए जाने की बात कही गई है।
शिकायतकर्ता ने दावा किया कि कबरई क्षेत्र से प्रतिदिन लगभग दो हजार वाहन निकलते हैं। उसने इन आरोपों की जांच कर कथित लेनदेन और संबंधित लोगों की भूमिका स्पष्ट करने की मांग की है। हालांकि, इन दावों की पुष्टि के लिए ठोस साक्ष्यों और विभागीय रिकॉर्ड की जांच आवश्यक है।
धमकी देने का भी लगाया आरोप
ट्रिपर मालिक का आरोप है कि एआरटीओ से बात करने जाने पर उसे झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी जाती है। उसने जिलाधिकारी से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने के साथ संबंधित अधिकारी की संपत्ति की जांच कराने की मांग भी की है।
जांच के बाद स्पष्ट होगी स्थिति
शिकायतकर्ता ने 14 अक्टूबर को दिए गए प्रार्थना पत्र में प्रशासन से उचित कार्रवाई की गुहार लगाई है। फिलहाल शिकायत पर प्रशासन की कार्रवाई और परिवहन विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है।
अब सवाल है कि वाहन को किस आधार पर ले जाया गया और कथित एंट्री वसूली के आरोपों में कितनी सच्चाई है। निष्पक्ष जांच से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। आरोप प्रमाणित होने पर नियमानुसार कार्रवाई और निराधार पाए जाने पर स्थिति स्पष्ट करना प्रशासन की जिम्मेदारी होगी।




