महोबा में डीएपी खाद को लेकर हंगामा, किसानों और निजी विक्रेता के बीच मारपीट का आरोप
सुबह तीन बजे से खाद के लिए लाइन में लगे रहे किसान, टोकन मिलने के बाद भी नहीं मिली डीएपी; ट्रैक्टर-ट्रॉली में खाद भरकर ले जाने पर कालाबाजारी का आरोप लगाते हुए किसानों ने किया विरोध
महोबा/पनवाड़ी। जनपद महोबा में डीएपी खाद की किल्लत के बीच किसानों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है। खाद के लिए किसानों को सुबह से लेकर देर रात तक लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। इसके बावजूद पर्याप्त खाद नहीं मिलने से किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ताजा मामला पनवाड़ी स्थित कृषि केंद्र एग्रीजंक्शन का है, जहां खाद लेने पहुंचे किसानों और निजी विक्रेता के बीच विवाद के बाद मारपीट और धक्का-मुक्की के आरोप सामने आए हैं।
जानकारी के अनुसार, सौरा गांव के कई किसान डीएपी खाद लेने के लिए पनवाड़ी स्थित कृषि केंद्र एग्रीजंक्शन पहुंचे थे। किसानों का कहना है कि वे सुबह करीब तीन बजे से ही खाद मिलने की उम्मीद में लाइन लगाकर खड़े हो गए थे। घंटों इंतजार करने के बाद उन्हें टोकन भी दिए गए, लेकिन देर रात तक टोकन मिलने के बावजूद किसानों को खाद उपलब्ध नहीं कराई गई।
इसी दौरान किसानों ने आरोप लगाया कि एक तरफ खाद के लिए किसान घंटों लाइन में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ ट्रैक्टर-ट्रॉली में खाद भरकर बाहर ले जाई जा रही थी। किसानों ने जब इस पर आपत्ति जताई और निजी विक्रेता से सवाल किया कि लाइन में लगे किसानों को खाद देने के बजाय ट्रैक्टर-ट्रॉली में खाद क्यों भेजी जा रही है, तो विवाद शुरू हो गया।
देखते ही देखते कहासुनी ने उग्र रूप ले लिया। आरोप है कि निजी विक्रेता और किसानों के बीच मारपीट हुई। इस दौरान सौरा गांव के प्रधान प्रतिनिधि के साथ भी धक्का-मुक्की किए जाने की बात सामने आई है। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
पुलिस की भूमिका पर भी उठे सवाल

घटना से नाराज पीड़ित किसान पनवाड़ी कोतवाली पहुंचे और पूरे मामले की शिकायत करते हुए शिकायती पत्र सौंपा। किसानों ने आरोप लगाया कि खाद वितरण में अनियमितता और कथित कालाबाजारी का विरोध करने पर उनके साथ मारपीट की गई, लेकिन पुलिस की ओर से तत्काल प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
किसानों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराकर निजी विक्रेता के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही यह भी मांग उठाई है कि कृषि केंद्र पर उपलब्ध डीएपी खाद के स्टॉक, वितरण रजिस्टर, किसानों को जारी किए गए टोकन और ट्रैक्टर-ट्रॉली से बाहर भेजी गई खाद की जांच कराई जाए।
आखिर किसानों को कब मिलेगी राहत?
इस घटना ने खाद वितरण व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जब किसान रात-दिन लाइन में लगकर खाद लेने को मजबूर हैं, तो खाद का वितरण किस आधार पर किया जा रहा है? टोकन मिलने के बाद भी किसानों को खाद क्यों नहीं मिली? ट्रैक्टर-ट्रॉली में खाद भरकर ले जाने के पीछे क्या वजह थी?
अब किसानों की निगाहें कृषि विभाग और जिला प्रशासन पर टिकी हैं। जरूरत है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि खाद की कालाबाजारी या वितरण में गड़बड़ी की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए, ताकि खेती के महत्वपूर्ण समय में किसानों को खाद के लिए इस तरह परेशान न होना पड़े।
नोट: मारपीट, कालाबाजारी और पुलिस की निष्क्रियता से जुड़े आरोप किसानों की शिकायत पर आधारित हैं। इनकी आधिकारिक पुष्टि और संबंधित पक्ष का बयान सामने आना बाकी है।



