मुढारी में जल जीवन मिशन की पड़ताल में सामने आए चौंकाने वाले खुलासे
महोबा। जिले में बीते शुक्रवार को उस समय राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई, जब जल जीवन मिशन को लेकर कैबिनेट मंत्री और भाजपा विधायक के बीच टकराव की खबरें सामने आईं। इसी बीच मुढारी गांव की जमीनी हकीकत ने सरकारी दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कागज़ों में पूरी बताई जा रही योजना, गांव में आज भी अधूरी नजर आ रही है।

जल जीवन मिशन का मुख्य उद्देश्य वर्ष 2024 तक हर ग्रामीण परिवार को व्यक्तिगत नल कनेक्शन के माध्यम से प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 55 लीटर सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना है, ताकि “हर घर जल” का सपना साकार हो सके। इससे महिलाओं को दूर-दराज के कुओं और हैंडपंपों से पानी ढोने की मजबूरी से राहत मिले और ग्रामीण जीवन सुगम बने। लेकिन मुढारी गांव में यह उद्देश्य अब तक कागज़ों तक ही सीमित दिखाई देता है।
मुढारी, महोबा जिले का वह गांव है जो पानी की समस्या को लेकर अक्सर सुर्खियों में रहा है। गांव के देवेंद्र राठौर, सुजीत राजपूत, दिलीप सेन, रोहित तिवारी, राहुल मिश्रा, ब्रजेश नागायच, जैनेन्द्र राजपूत, गोविंद्र तिवारी, विजयकान्त पुरोहित, दिनेश कुशवाहा, प्रेमनारायण नामदेव, मनोज रैकवार, नीरज अहिरवार सहित कई ग्रामीणों का आरोप है कि यदि जल जीवन मिशन की बदहाली का मुद्दा सामने न आता, तो शायद गांव की स्थिति पर ऐसे ही लीपा-पोती होती रहती।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों पहले दिए गए नल कनेक्शन आज शोपीस बनकर घरों की शोभा बढ़ा रहे हैं। नीले पाइप तो लगे हैं, लेकिन आज तक उनसे पानी की एक बूंद भी नहीं टपकी। गला तर करने को तरसते ग्रामीण आज भी पुराने जल स्रोतों पर निर्भर हैं।
स्थिति यहीं तक सीमित नहीं है। ठेकेदारों द्वारा पाइपलाइन खुदाई के बाद सड़कों की मरम्मत न किए जाने से गांव की गलियां कीचड़ और दलदल में तब्दील हो गई हैं। कई स्थानों पर पाइपलाइन लीकेज के कारण हालात और बदतर हैं। गांव की मुख्य गलियों में आज भी करीब 40 प्रतिशत से अधिक रास्तों में पाइपलाइन डाली ही नहीं गई, और जहां डाली गई, वहां पानी नहीं पहुंचा।
ग्रामीणों का आरोप है कि बार-बार सूचना देने के बावजूद कई मोहल्लों में पाइपलाइन नहीं जोड़ी गई। जिन स्थानों पर पानी की आपूर्ति शुरू भी हुई है, वहां कीचड़युक्त और गंदा पानी सप्लाई किया जा रहा है, जो स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकता है।
मुढारी में जल जीवन मिशन की यह तस्वीर न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करती है, बल्कि सरकारी योजनाओं की निगरानी और जवाबदेही पर भी सवाल उठाती है। अब देखना यह है कि इन खुलासों के बाद जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि कब तक ठोस कार्रवाई करते हैं, या फिर मुढारी के लोग यूं ही “हर घर जल” के वादे का इंतजार करते रहेंगे।


