महोबा: मामना गांव की महिलाओं का कलेक्ट्रेट में जोरदार प्रदर्शन, आवासीय पट्टों की मांग को लेकर उठाई आवाज
महोबा जिले के मामना गांव में गंभीर आवासीय संकट को लेकर सोमवार को लगभग 50 महिलाओं ने कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। हाथों में तख्तियां और मांगपत्र लेकर पहुंचीं इन महिलाओं ने ग्राम समाज की खाली पड़ी जमीन पर आवासीय पट्टे आवंटित करने की मांग की। महिलाओं का कहना है कि गांव में कई ऐसे परिवार हैं जिनके पास रहने के लिए अपनी जमीन तक नहीं है और वे वर्षों से प्रशासनिक कार्यालयों के चक्कर काट रही हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सका है।

प्रदर्शन में शामिल महिलाओं ने बताया कि मामना गांव में करीब 40 परिवार ऐसे हैं, जिनके पास अपना मकान या जमीन नहीं है। परिवार बढ़ने के साथ-साथ उनके छोटे-छोटे घरों में रहना बेहद कठिन हो गया है। एक कमरे में कई पीढ़ियों को साथ रहना पड़ता है, जिससे न केवल निजता खत्म हो गई है, बल्कि स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े खतरे भी लगातार बढ़ते जा रहे हैं। बरसात के मौसम में हालात और भी बदतर हो जाते हैं, जब टपकती छतें और कच्ची दीवारें परिवारों की परेशानी को कई गुना बढ़ा देती हैं।
गांव की आशा रानी, प्यारी, गुड़िया और सावित्री देवी जैसी महिलाओं ने बताया कि वे वर्षों से प्रशासन के समक्ष अपनी पीड़ा रखती आ रही हैं। कई बार तहसील और ब्लॉक स्तर पर शिकायत पत्र दिए गए, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला। उनका आरोप है कि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद उनकी समस्या को गंभीरता से नहीं लिया गया। महिलाओं ने कहा कि गरीबी और संसाधनों की कमी के चलते वे निजी जमीन खरीदने की स्थिति में नहीं हैं, ऐसे में ग्राम समाज की खाली पड़ी जमीन ही उनके लिए एकमात्र उम्मीद है।
महिलाओं की मुख्य मांग है कि उन्हें गांव में उपलब्ध सरकारी या ग्राम समाज की खाली जमीन पर आवासीय पट्टे दिए जाएं, ताकि वे अपने परिवार के लिए सुरक्षित घर बना सकें। उनका कहना है कि यदि उन्हें पट्टा मिल जाता है तो वे प्रधानमंत्री आवास योजना या अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर पक्का मकान भी बना सकती हैं। इससे न केवल उन्हें सिर छुपाने के लिए स्थायी छत मिलेगी, बल्कि उनके बच्चों का भविष्य भी सुरक्षित होगा।
प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने यह भी बताया कि उनके पास मवेशी हैं, जो उनकी आजीविका का प्रमुख साधन हैं। सीमित जगह के कारण उन्हें अपने पशुओं को रखने में भी काफी दिक्कत होती है। कई बार मवेशियों को खुले में बांधना पड़ता है, जिससे चोरी और नुकसान का खतरा बना रहता है। यदि उन्हें पर्याप्त जमीन मिल जाए तो वे पशुपालन को बेहतर ढंग से कर सकेंगी और अपनी आर्थिक स्थिति में सुधार ला सकेंगी।
कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन सौंपते हुए जल्द से जल्द कार्रवाई की मांग की। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि गांव में उपलब्ध खाली भूमि का सर्वे कराकर पात्र परिवारों को शीघ्र पट्टे आवंटित किए जाएं। महिलाओं का कहना था कि यह कोई नई मांग नहीं है, बल्कि वर्षों से लंबित समस्या है, जिसका समाधान अब तक नहीं हो सका है।
प्रदर्शन के दौरान कई महिलाओं की आंखों में आंसू भी छलक आए। उन्होंने बताया कि तंग हालात में बच्चों का पालन-पोषण करना कितना मुश्किल हो जाता है। पढ़ाई के लिए उचित माहौल न मिल पाने के कारण बच्चों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। कई परिवारों में बुजुर्ग और बीमार सदस्य भी हैं, जिन्हें संकरी जगह में रखना बेहद कष्टदायक है। ऐसे में एक छोटे से टुकड़े की जमीन उनके जीवन को पूरी तरह बदल सकती है।
महिलाओं ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो वे अपने आंदोलन को और तेज करेंगी। जरूरत पड़ने पर वे अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन और भूख हड़ताल जैसे कदम उठाने से भी पीछे नहीं हटेंगी। उनका कहना है कि अब वे सिर्फ आश्वासनों के सहारे नहीं बैठ सकतीं, बल्कि ठोस निर्णय और जमीन पर अमल चाहती हैं।
इस पूरे मामले पर प्रशासनिक अधिकारियों ने महिलाओं को भरोसा दिलाया कि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। संबंधित विभागों को गांव की स्थिति का सर्वे कर रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि पात्र परिवारों की पहचान कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी, ताकि वास्तविक जरूरतमंदों को लाभ मिल सके।
अब देखना यह होगा कि महोबा प्रशासन इन बेघर और जरूरतमंद परिवारों की पुकार पर कितनी जल्दी और कितनी प्रभावी कार्रवाई करता है। मामना गांव की महिलाओं की यह लड़ाई केवल जमीन के एक टुकड़े की नहीं, बल्कि सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन की है। यदि समय रहते समाधान नहीं निकला तो यह आंदोलन आने वाले दिनों में और व्यापक रूप ले सकता है, जिससे प्रशासन पर दबाव और बढ़ेगा।
