मुढ़ारी में विकास की राह देख रही जनता, विधायक गुड्डू भइया के इंतजार में ग्रामीण!

मुढ़ारी में विकास की राह देख रही जनता, विधायक गुड्डू भइया के इंतजार में ग्रामीण!

दलित बस्तियों में पक्के आवास का इंतजार बरकरार, ग्रामीणों ने उठाए जनप्रतिनिधि की सक्रियता पर सवाल; बोले- चुनाव के समय दिखने वाले विधायक अब क्षेत्र में नजर नहीं आते

महोबा। चरखारी विधानसभा क्षेत्र के ग्राम मुढ़ारी में विकास कार्यों और जनसमस्याओं को लेकर ग्रामीणों के बीच नाराजगी बढ़ती नजर आ रही है। गांव के लोगों का आरोप है कि चुनाव के समय गली-गली पहुंचकर वोट मांगने वाले जनप्रतिनिधि चुनाव जीतने के बाद क्षेत्र से दूरी बना लेते हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, गांव में बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी कई समस्याएं आज भी जस की तस बनी हुई हैं, लेकिन उनकी आवाज सुनने वाला कोई नजर नहीं आता। ग्रामीणों ने स्थानीय विधायक गुड्डू भइया की क्षेत्र में सक्रियता और गांव के विकास को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि गांव में विकास की बड़ी-बड़ी बातें तो सुनने को मिलती हैं, लेकिन धरातल पर उनका असर दिखाई नहीं देता। खासकर दलित बस्तियों की स्थिति को लेकर लोगों में नाराजगी है। आरोप है कि कई जरूरतमंद परिवार आज भी पक्के आवास की सुविधा से वंचित हैं। बरसात और खराब मौसम के दौरान कच्चे मकानों में रहने वाले परिवारों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कहीं छत टपकती है तो कहीं दीवारें गिरने का खतरा बना रहता है। ऐसे परिवारों के लिए सरकारी आवास योजना आज भी उम्मीद बनकर रह गई है।

ग्रामीणों का सवाल है कि जब सरकार गरीबों को पक्की छत उपलब्ध कराने के लिए आवास योजनाएं चला रही है, तो मुढ़ारी के पात्र परिवारों को इसका लाभ कब मिलेगा? क्या जिम्मेदार अधिकारियों ने वास्तव में गांव का सर्वे किया है? यदि सर्वे हुआ है तो पात्र परिवारों को आवास क्यों नहीं मिला? इन सवालों के जवाब ग्रामीण प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग रहे हैं।

चुनाव के समय सक्रियता, बाद में दूरी का आरोप

गांव के लोगों की नाराजगी का एक बड़ा कारण जनप्रतिनिधि की कथित गैरमौजूदगी भी है। ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के दौरान नेताओं को गांव की हर गली और हर परिवार की याद रहती है। उस समय विकास के वादे किए जाते हैं और समस्याओं के समाधान का भरोसा दिलाया जाता है, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही वही जनप्रतिनिधि जनता की पहुंच से दूर हो जाते हैं।

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ग्रामीणों के बीच यह मांग भी जोर पकड़ रही है कि क्षेत्र का प्रतिनिधित्व ऐसा व्यक्ति करे जो स्थानीय समस्याओं को समझता हो, गांव के लोगों के बीच नियमित रूप से उपलब्ध रहे और जरूरत पड़ने पर मौके पर पहुंचकर उनकी परेशानी सुने। लोगों का कहना है कि उन्हें केवल चुनावी वादे नहीं, बल्कि जमीन पर काम और जवाबदेही चाहिए।

बाहरी बनाम स्थानीय प्रतिनिधि की बहस तेज

मुढ़ारी में उठ रही आवाज अब केवल आवास और विकास तक सीमित नहीं दिखाई दे रही, बल्कि प्रतिनिधित्व के सवाल तक पहुंच गई है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र को ऐसा जनप्रतिनिधि चाहिए जो जनता के बीच रहे, उनकी समस्याओं को अधिकारियों तक पहुंचाए और विकास कार्यों की नियमित निगरानी करे।

हालांकि, गांव में उठाए गए इन आरोपों और शिकायतों पर संबंधित विधायक तथा प्रशासन का पक्ष सामने आना बाकी है। ऐसे में यह भी जरूरी है कि जिम्मेदार अधिकारी गांव का स्थलीय निरीक्षण कराकर आवास से वंचित पात्र परिवारों की स्थिति स्पष्ट करें।

अब बड़ा सवाल यह है कि मुढ़ारी की जनता को विकास के लिए आखिर कब तक इंतजार करना पड़ेगा? क्या दलित बस्तियों को पक्की छत मिलेगी? क्या गांव की समस्याएं जनप्रतिनिधियों तक पहुंचेंगी या फिर चुनाव आने तक जनता यूं ही उम्मीद लगाए बैठी रहेगी?

ग्रामीणों की मांग साफ है—उन्हें भाषण नहीं, विकास चाहिए; आश्वासन नहीं, समाधान चाहिए और ऐसा जनप्रतिनिधि चाहिए जो चुनाव के बाद भी उनके बीच मौजूद रहे।

खबर: महोबा जनता की आवाज

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