स्वास्थ्य मंत्री की हिंदी में दवा लिखने की अपील के बाद भी महोबा जिला अस्पताल में अंग्रेजी में लिखी जा रही दवाएं!

महोबा ब्रेकिंग न्यूज़ ✍️

स्वास्थ्य मंत्री की हिंदी में दवा लिखने की अपील के बाद भी महोबा जिला अस्पताल में अंग्रेजी में लिखी जा रही दवाएं!

महोबा। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक ने हाल ही में प्रदेश के चिकित्सकों से मरीजों के पर्चे पर दवाओं और जांचों के नाम हिंदी अथवा देवनागरी लिपि में लिखने की अपील की थी। उनका कहना था कि इससे मरीजों को यह समझने में आसानी होगी कि उन्हें कौन-सी दवा दी गई है।

लेकिन महोबा जिला अस्पताल में इस पहल का असर जमीन पर कितना दिखाई दे रहा है, यह सवाल अब चर्चा का विषय बन गया है।

अस्पताल में मरीजों को दिए जा रहे पर्चों पर यदि दवाओं के नाम अब भी अंग्रेजी में लिखे जा रहे हैं, तो मरीजों के लिए उन्हें समझना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब स्वास्थ्य मंत्री स्वयं दवाओं के नाम हिंदी या देवनागरी में लिखने की अपील कर चुके हैं, तो स्थानीय स्तर पर इसका पालन कब शुरू होगा?

स्वास्थ्य मंत्री ने अपने पत्र में डॉक्टरों से मरीजों से उनकी मातृभाषा या स्थानीय भाषा में संवाद करने पर भी जोर दिया था, ताकि मरीज अपनी बीमारी और चिकित्सकीय सलाह को बेहतर ढंग से समझ सकें।

मरीजों का सवाल—पर्चे पर दवा का नाम समझना कब होगा आसान?

जिला अस्पताल में इलाज कराने आने वाले मरीजों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि डॉक्टरों द्वारा लिखी जाने वाली दवाओं के नाम यदि हिंदी/देवनागरी में भी लिखे जाएं तो आम मरीज उन्हें आसानी से समझ सकेंगे।

वहीं, यदि अस्पताल में बाहर से दवा खरीदने के लिए भी मरीजों को लिखा जा रहा है, तो यह एक अलग गंभीर मुद्दा है। स्वास्थ्य मंत्री पहले भी सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बाहर से दवा लिखे जाने के खिलाफ निर्देश दे चुके हैं।

अब देखना यह है कि महोबा जिला अस्पताल में स्वास्थ्य मंत्री की हिंदी में दवा लिखने की पहल कब तक धरातल पर दिखाई देती है और मरीजों को पर्चे पर दवाओं के नाम अपनी समझ की भाषा में कब मिलेंगे।

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