विद्यालय से कथित गैरहाजिरी से लेकर निजी शिक्षण संस्थानों के संचालन तक के आरोप, शिकायतकर्ता ने मांगी उच्चस्तरीय जांच
महोबा। कन्या प्राथमिक विद्यालय बम्हौरी कला के प्रधानाध्यापक राजीव कुमार चौहान को लेकर की गई शिकायत ने शिक्षा विभाग में सवाल खड़े कर दिए हैं। जिलाधिकारी को भेजी गई शिकायत में प्रधानाध्यापक पर विद्यालय में नियमित रूप से उपस्थित नहीं रहने और झांसी के मऊरानीपुर में संचालित निजी शिक्षण संस्थानों की देखरेख में समय देने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत के बाद मामले में जांच और कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि प्रधानाध्यापक विद्यालय में नियमित रूप से उपस्थित नहीं होते और कथित तौर पर महीने में केवल एक-दो दिन ही विद्यालय पहुंचते हैं। इसके बावजूद पूरे माह की उपस्थिति दर्ज कर वेतन प्राप्त करने का आरोप लगाया गया है। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो यह विद्यालय की व्यवस्था, शिक्षक की जवाबदेही और सरकारी धन से मिलने वाले वेतन की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।
मऊरानीपुर के निजी संस्थानों से जुड़ाव का आरोप
शिकायत में प्रधानाध्यापक के झांसी जनपद के मऊरानीपुर में निजी शिक्षण संस्थानों से जुड़े होने का भी दावा किया गया है। दस्तावेज में K.S. Academy, K.S. College of Education और K.S. Mahila Mahavidyalaya सहित अन्य संस्थानों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया गया है कि प्रधानाध्यापक इन संस्थानों की देखरेख में समय देते हैं।
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि इस पूरे मामले की केवल कागजी जांच न कराकर भौतिक सत्यापन कराया जाए। इसके तहत विद्यालय में प्रधानाध्यापक की वास्तविक उपस्थिति और मऊरानीपुर स्थित निजी संस्थानों में उनकी कथित मौजूदगी की जांच किए जाने की मांग की गई है।
स्थानीय अधिकारियों पर भी उठाए सवाल

मामले में शिकायतकर्ता ने स्थानीय शिक्षा अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पूर्व में आईजीआरएस के माध्यम से शिकायतें किए जाने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इसी आधार पर अब जिलाधिकारी से मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है।
शिकायतकर्ता ने यह भी कहा है कि जांच के दौरान विद्यालय के उपस्थिति रजिस्टर, वेतन संबंधी अभिलेख और वास्तविक उपस्थिति का मिलान किया जाए। साथ ही मऊरानीपुर में बताए गए निजी शिक्षण संस्थानों के संबंध में भी मौके पर जाकर तथ्यों का सत्यापन किया जाए।
जांच के बाद ही साफ होगी आरोपों की हकीकत
मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि शिकायत में एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक की कथित अनुपस्थिति के साथ-साथ निजी शिक्षण संस्थानों से उनके जुड़ाव का आरोप लगाया गया है। ऐसे में जांच एजेंसी के सामने यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा कि प्रधानाध्यापक विद्यालय में कितने दिन उपस्थित रहे, उनकी उपस्थिति किस आधार पर दर्ज हुई और निजी संस्थानों से उनके संबंध एवं वहां उनकी भूमिका क्या है।
शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी से मांग की है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों और प्रधानाध्यापक के विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
हालांकि, महत्वपूर्ण बात यह है कि दस्तावेज में लगाए गए आरोप शिकायतकर्ता के हैं। उपलब्ध दस्तावेज से आरोपों की अंतिम पुष्टि नहीं होती है। इसलिए पूरे मामले की वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।





