महोबा जिला जेल में जन्मी नन्ही कली: कैद के सन्नाटे में गूंजा खुशियों का संगीत, ढोल-नगाड़ों के साथ हुआ स्वागत
महोबा। आमतौर पर जेल का नाम सुनते ही मन में सन्नाटा, उदासी और सख्ती की तस्वीर उभरती है, लेकिन महोबा जिला जेल में हाल ही में एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं और दिल को सुकून से भर दिया। हत्या के आरोप में बंद एक महिला कैदी सीमा ने जेल के दौरान एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया, जिसके बाद जेल परिसर में जश्न जैसा माहौल देखने को मिला। ढोल-नगाड़ों, फूलों और गुब्बारों से सजी एंबुलेंस में नन्ही बच्ची का जेल में प्रवेश किसी उत्सव से कम नहीं था।

जानकारी के अनुसार, हमीरपुर जनपद की निवासी सीमा अपने पति लोकेश के साथ प्रेमी की हत्या के आरोप में मई 2025 से महोबा जिला जेल में बंद है। जब सीमा को जेल लाया गया था, उस समय वह लगभग पांच माह की गर्भवती थी। जेल प्रशासन ने उसकी स्थिति को देखते हुए नियमित स्वास्थ्य जांच, संतुलित आहार और विशेष देखभाल की व्यवस्था की थी। समय-समय पर डॉक्टरों द्वारा उसकी जांच कराई जाती रही ताकि मां और गर्भस्थ शिशु दोनों सुरक्षित रह सकें।
बीते दिनों सीमा को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई, जिसके बाद उसे तुरंत महोबा जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में सुरक्षित प्रसव कराया गया, जहां सीमा ने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। मां और नवजात दोनों पूरी तरह स्वस्थ बताए जा रहे हैं। बच्ची के जन्म की खबर मिलते ही जेल प्रशासन में भी खुशी की लहर दौड़ गई।
जेलर पीके मिश्रा ने इस खास पल को यादगार बनाने का निर्णय लिया। उनके निर्देश पर जच्चा-बच्चा को जेल वापस लाने के लिए एंबुलेंस को फूलों, रंग-बिरंगे गुब्बारों और सजावटी सामग्री से भव्य रूप से सजाया गया। जब सजी-धजी एंबुलेंस ढोल-नगाड़ों की थाप के साथ जेल के मुख्य द्वार पर पहुंची, तो वहां मौजूद कैदियों और जेल स्टाफ के चेहरों पर मुस्कान फैल गई। यह दृश्य बेहद भावुक और प्रेरणादायक था।
जेल परिसर में पहुंचते ही महिला सुरक्षाकर्मियों और अन्य बंदियों ने बच्ची का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया। किसी ने उसकी नजर उतारी तो किसी ने दुलार कर आशीर्वाद दिया। कुछ महिला कैदियों ने नन्ही बच्ची पर निछावर भी की। चारों ओर उत्सव जैसा माहौल था, मानो किसी परिवार में नए सदस्य का आगमन हुआ हो। जेल की दीवारों के भीतर पहली बार इस तरह की खुशियों की गूंज सुनाई दी।
जेलर पीके मिश्रा स्वयं बच्ची को गोद में लेकर काफी देर तक उसे निहारते रहे और उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि यह बच्ची किसी अपराध की दोषी नहीं है और उसे एक सामान्य, सुरक्षित और खुशहाल जीवन का पूरा अधिकार है। जेल प्रशासन का प्रयास है कि मां और बच्चे को यहां किसी भी तरह की असुविधा न हो।
जेल प्रशासन अब जिला जज से अनुमति लेकर जेल परिसर में ही बच्ची की छठी का कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी कर रहा है। विधि-विधान से छठी संस्कार और नामकरण की रस्म पूरी की जाएगी, ताकि बच्ची का जीवन शुभ और मंगलमय हो। इस आयोजन में जेल के अधिकारी, कर्मचारी और महिला बंदी शामिल होंगे। इससे न केवल मां को भावनात्मक संबल मिलेगा, बल्कि अन्य कैदियों के मन में भी सकारात्मक सोच विकसित होगी।
यह घटना समाज के लिए एक संदेश भी है कि अपराध की सजा भुगत रहे लोगों के भीतर भी इंसानियत और संवेदनाएं जीवित रहती हैं। जेल केवल सजा देने का स्थान नहीं, बल्कि सुधार और पुनर्वास का केंद्र भी है। इस तरह के मानवीय प्रयास बंदियों के जीवन में उम्मीद की किरण जगाते हैं और उन्हें बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा देते हैं।
जेल में मौजूद कई महिला कैदियों ने कहा कि बच्ची के आगमन से पूरे माहौल में सकारात्मक ऊर्जा भर गई है। सभी को ऐसा लगा मानो वे अपने परिवार के बीच हैं। कुछ बंदियों ने भावुक होकर कहा कि यह बच्ची उनके लिए आशा की प्रतीक है, जो उन्हें अपने जीवन को नए सिरे से देखने की प्रेरणा दे रही है।
फिलहाल सीमा और उसकी नवजात बच्ची को जेल के महिला वार्ड में विशेष निगरानी में रखा गया है। चिकित्सकों की टीम नियमित जांच कर रही है और पोषण युक्त आहार उपलब्ध कराया जा रहा है। जेल प्रशासन ने साफ किया है कि मां और बच्चे की सुरक्षा व स्वास्थ्य सर्वोच्च प्राथमिकता है।
महोबा जिला जेल में जन्मी यह नन्ही कली न केवल एक नई जिंदगी की शुरुआत का प्रतीक है, बल्कि यह साबित करती है कि कठोर परिस्थितियों के बीच भी करुणा, संवेदना और मानवता की भावना जीवित रह सकती है। यह घटना लंबे समय तक लोगों के दिलों में एक उम्मीद और सकारात्मक सोच की मिसाल बनकर रहेगी।

