खाद वितरण में लापरवाही पर डीएम का बड़ा एक्शन, चार बी-पैक्स सचिव निलंबित
22 अक्टूबर से समितियों से चल रहे थे गायब, हड़ताल के चलते किसानों को खाद मिलने में हो रही थी परेशानी; 21 केंद्रों से लगातार जारी है खाद वितरण
महोबा। रबी सीजन में किसानों को खाद उपलब्ध कराने में लापरवाही बरतने और हड़ताल के नाम पर समितियों से अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारियों के खिलाफ जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी प्रभास कुमार ने चार बी-पैक्स (सहकारी समितियों) के सचिवों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इन सचिवों पर 22 अक्टूबर से समितियों से अनुपस्थित रहने और खाद वितरण व्यवस्था प्रभावित करने का आरोप है। प्रशासन की इस कार्रवाई से सहकारी विभाग में हड़कंप मच गया है।
दरअसल, रबी की बुआई का सीजन शुरू होते ही महोबा जिले में डीएपी और यूरिया खाद की मांग बढ़ गई है। खेतों में बुआई के लिए किसान खाद की व्यवस्था करने में जुटे हैं, लेकिन दूसरी ओर सहकारी समितियों पर खाद की उपलब्धता और वितरण को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही थीं। किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी संभालने वाली समितियों के कई सचिवों के हड़ताल पर चले जाने से व्यवस्था प्रभावित होने लगी थी।
खाद वितरण छोड़ हड़ताल पर चले गए सचिव
प्रशासन के मुताबिक, चार बी-पैक्स सचिव 22 अक्टूबर से अपनी समितियों में अनुपस्थित चल रहे थे। आरोप है कि किसानों को डीएपी और यूरिया उपलब्ध कराने के महत्वपूर्ण समय में सचिवों ने खाद वितरण की जिम्मेदारी निभाने के बजाय हड़ताल का रास्ता अपनाया। इतना ही नहीं, खाद बिक्री से प्राप्त धनराशि कैश एंड कैरी खाते में जमा नहीं कराने का मामला भी सामने आया। इसे प्रशासन ने सरकारी कार्यों में लापरवाही और किसानों के हितों की अनदेखी माना।

एआर कोऑपरेटिव से प्राप्त जानकारी के आधार पर जिलाधिकारी ने चारों सचिवों के निलंबन की कार्रवाई की। प्रशासन का दावा है कि इस कार्रवाई के बाद हड़ताल पर गए अन्य सचिव और पैक्स कर्मचारी भी काम पर लौट आए हैं। इससे सहकारी समितियों के माध्यम से खाद वितरण व्यवस्था दोबारा पटरी पर आने की उम्मीद जताई जा रही है।
21 केंद्रों से किसानों को मिल रही खाद
जिलाधिकारी प्रभास कुमार ने सोमवार शाम छह बजे जानकारी देते हुए बताया कि जिले में खाद की उपलब्धता और वितरण पर प्रशासन लगातार नजर बनाए हुए है। उन्होंने बताया कि जिले के 21 अन्य उर्वरक बिक्री केंद्रों के माध्यम से किसानों को लगातार खाद उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि रबी फसलों की बुआई प्रभावित न हो।
डीएम ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि किसानों के हितों के साथ खिलवाड़ करने, खाद वितरण में बाधा डालने और शासकीय कार्यों में लापरवाही बरतने वाले किसी भी कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा। ऐसे कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
अब देखना होगा कि प्रशासन की इस सख्ती के बाद जिले में खाद वितरण व्यवस्था कितनी बेहतर होती है और किसानों को डीएपी एवं यूरिया के लिए समितियों के चक्कर लगाने से कितनी राहत मिल पाती है।







