महोबा जिला अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ की ड्यूटी पर उठे सवाल, जांच की मांग
सप्ताहों तक अनुपस्थित रहने के आरोप, बच्चों के इलाज पर चिंता; बायोमेट्रिक हाजिरी, ड्यूटी रोस्टर और ओपीडी रजिस्टर की जांच से सामने आएगी हकीकत
महोबा। जिला पुरुष अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेंद्र कुमार गुप्ता की नियमित उपलब्धता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि डॉक्टर कभी एक-दो सप्ताह तो कभी लंबे अंतराल के बाद अस्पताल पहुंचते हैं। हालांकि, इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग और जिला अस्पताल प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग उठ रही है।
मामला बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ा होने के कारण इसकी गंभीरता और बढ़ जाती है। जिला अस्पताल में बड़ी संख्या में अभिभावक अपने बच्चों का इलाज कराने पहुंचते हैं। बुखार, संक्रमण, सांस लेने में परेशानी और अन्य बीमारियों से पीड़ित बच्चों को समय पर विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह की जरूरत होती है। ऐसे में बाल रोग विशेषज्ञ की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करना अस्पताल प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
डॉक्टर की उपस्थिति पर सवाल, मरीजों को मिले इलाज
स्थानीय स्तर पर डॉ. राजेंद्र कुमार गुप्ता की ड्यूटी को लेकर उठ रहे सवालों के बीच सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि निर्धारित समय पर बच्चों को विशेषज्ञ चिकित्सक की सेवाएं मिल रही हैं या नहीं। यदि डॉक्टर किसी दिन अस्पताल में उपलब्ध नहीं रहते, तो मरीजों के इलाज के लिए वैकल्पिक व्यवस्था क्या होती है? अभिभावकों को दूसरे चिकित्सक के पास भेजा जाता है या उन्हें इंतजार करना पड़ता है?
इन सवालों का जवाब केवल मौखिक स्पष्टीकरण से नहीं, बल्कि अस्पताल के आधिकारिक रिकॉर्ड की जांच से सामने आ सकता है।
छह महीने के रिकॉर्ड की जांच से खुलेगा राज
मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए पिछले छह महीनों के ड्यूटी रोस्टर, बायोमेट्रिक हाजिरी, उपस्थिति पंजिका और ओपीडी रजिस्टर का मिलान कराने की मांग महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही संबंधित अवधि में स्वीकृत अवकाश, प्रशिक्षण, अन्यत्र तैनाती अथवा विभागीय आदेशों की भी जांच होनी चाहिए।
यदि डॉक्टर निर्धारित ड्यूटी के दौरान बिना किसी वैध कारण के अनुपस्थित पाए जाते हैं, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं, यदि उनकी अनुपस्थिति के पीछे कोई अधिकृत आदेश या स्वीकृत अवकाश है, तो उसे भी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाना चाहिए, ताकि तथ्यों के आधार पर निष्कर्ष निकाला जा सके।
अस्पताल प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल
सरकारी अस्पताल में चिकित्सकों की उपस्थिति सुनिश्चित करना केवल संबंधित डॉक्टर की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि अस्पताल प्रशासन का भी दायित्व है। ऐसे में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक और स्वास्थ्य विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि बाल रोग विशेषज्ञ की दैनिक उपस्थिति की निगरानी कैसे की जाती है और मरीजों की शिकायतों पर क्या कार्रवाई होती है।
यदि डॉक्टर नियमित रूप से अपनी सेवाएं दे रहे हैं, तो अस्पताल प्रशासन रिकॉर्ड के आधार पर स्थिति स्पष्ट कर सकता है। वहीं, यदि ड्यूटी व्यवस्था में कोई कमी सामने आती है, तो उसे दूर करने के लिए तत्काल कदम उठाए जाने चाहिए।
सरकारी वेतन के साथ जवाबदेही भी जरूरी
सरकारी चिकित्सकों को सार्वजनिक धन से वेतन दिया जाता है। इसके बदले निर्धारित ड्यूटी का पालन करना और मरीजों को चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराना उनकी जिम्मेदारी है। इसलिए किसी डॉक्टर की उपस्थिति को लेकर शिकायत सामने आने पर निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है।
महोबा जैसे जनपद में जिला अस्पताल गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए इलाज का प्रमुख सहारा है। ऐसे में विशेषज्ञ चिकित्सक की उपलब्धता पर सवाल उठने से मरीजों का सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर भरोसा प्रभावित हो सकता है।
अब स्वास्थ्य विभाग से जवाब की उम्मीद
डॉ. राजेंद्र कुमार गुप्ता की ड्यूटी को लेकर लगाए जा रहे आरोपों की पुष्टि आधिकारिक जांच के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग, मुख्य चिकित्सा अधिकारी और जिला अस्पताल प्रशासन से मांग है कि संबंधित रिकॉर्ड की जांच कर स्थिति स्पष्ट की जाए।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि महोबा जिला अस्पताल में बच्चों को निर्धारित समय पर बाल रोग विशेषज्ञ की सेवाएं मिल रही हैं या नहीं? यदि शिकायतों में सच्चाई है, तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और यदि आरोप निराधार हैं, तो आधिकारिक तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े इस मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों जरूरी हैं।




