पूर्व सांसद पर सरकारी चकरोड बंद कराने का आरोप, खेतों तक पहुंचने का रास्ता अवरुद्ध होने से किसान परेशान

पूर्व सांसद पर सरकारी चकरोड बंद कराने का आरोप, खेतों तक पहुंचने का रास्ता अवरुद्ध होने से किसान परेशान

वृद्ध कपूरी सहित कई किसानों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजा शिकायती पत्र, अधिकारियों पर भी सुनवाई न करने और पैमाइश में टालमटोल करने का आरोप

महोबा। जिले में किसानों के खेतों तक पहुंचने वाले सरकारी रास्ते को कथित रूप से बंद किए जाने का मामला सामने आया है। शहर के मोहल्ला बड़ीहाट निवासी वृद्ध कपूरी सहित अन्य किसानों ने पूर्व सांसद और कुछ प्रभावशाली लोगों पर सरकारी चकरोड पर कब्जा कर आवागमन बाधित करने का आरोप लगाया है। किसानों का कहना है कि खेतों तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता बंद होने से उनकी खेती-किसानी प्रभावित हो रही है। गरीब किसान और मजदूर अपने खेतों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। लंबे समय से अधिकारियों के चक्कर लगाने के बावजूद समस्या का समाधान न होने पर अब पीड़ितों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से न्याय की गुहार लगाई है।

पीड़ितों द्वारा 28 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री को संबोधित शिकायती पत्र भेजकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है। शिकायत में बताया गया है कि मौजा भटीपुरा स्थित गाटा संख्या 401, 402 और 405 में किसानों के खेत हैं। इन खेतों तक आवागमन के लिए राजस्व अभिलेखों में सरकारी चकरोड दर्ज होने की बात कही गई है। आरोप है कि इस रास्ते पर खंभे गाड़कर जंजीर लगा दी गई है, जिससे किसानों का आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है।

खंभे और जंजीर लगाकर बंद किया रास्ता

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि सरकारी चकरोड सार्वजनिक उपयोग के लिए है, जिससे आसपास के किसान अपने खेतों तक पहुंचते हैं। लेकिन प्रभावशाली लोगों द्वारा रास्ते पर अवरोध खड़ा कर दिए जाने से किसानों के सामने गंभीर समस्या पैदा हो गई है। किसानों का कहना है कि खेतों तक पहुंचने के लिए रास्ता बंद होने से उन्हें खेती के कार्यों में दिक्कत हो रही है। खेतों की जुताई, बुवाई, सिंचाई और फसल की देखरेख जैसे जरूरी काम प्रभावित हो रहे हैं। मजदूरों और कृषि उपकरणों को खेतों तक ले जाना भी मुश्किल हो गया है।

एसडीएम से कई बार लगाई गुहार, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई

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पीड़ित किसानों का कहना है कि रास्ता खुलवाने के लिए उन्होंने कई बार उपजिलाधिकारी महोबा के समक्ष प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किए। शिकायत के बाद अधिकारियों ने संबंधित लेखपाल और कानूनगो को मौके पर पहुंचकर जांच करने तथा राजस्व अभिलेखों के आधार पर पैमाइश कराने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद अब तक मौके पर वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है।

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि राजस्व कर्मचारियों द्वारा मौके पर पैमाइश कराने में लगातार टालमटोल की जा रही है। नतीजतन किसान अपनी समस्या लेकर एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय तक भटकने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते सरकारी चकरोड की पैमाइश कराकर उसे अतिक्रमण मुक्त करा दिया जाता तो उन्हें इस परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।

प्रभावशाली लोगों के सामने गरीब किसानों की सुनवाई नहीं!

पीड़ितों ने आरोप लगाया है कि प्रभावशाली लोगों के दबाव के चलते उनकी शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है। वृद्ध कपूरी सहित अन्य किसानों ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए भटीपुरा मौजे के गाटा संख्या 401, 402 और 405 तक जाने वाले सरकारी चकरोड की राजस्व अभिलेखों के आधार पर निष्पक्ष पैमाइश कराई जाए।

साथ ही मौके पर जांच कराकर यदि सरकारी रास्ते पर अवैध कब्जा पाया जाता है तो उसे तत्काल हटवाया जाए, ताकि किसानों को उनके खेतों तक आने-जाने का अधिकार मिल सके।

अब बड़ा सवाल यह है कि सरकारी अभिलेखों में दर्ज बताए जा रहे चकरोड पर खंभे और जंजीर लगाकर रास्ता किसके आदेश पर बंद किया गया है? क्या राजस्व विभाग मौके पर निष्पक्ष पैमाइश कराकर किसानों को रास्ता उपलब्ध करा पाएगा या फिर गरीब किसान इसी तरह अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर काटते रहेंगे? फिलहाल पीड़ित किसानों को मुख्यमंत्री से न्याय मिलने की उम्मीद है। मामले में संबंधित पक्ष और प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।

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