नीला ड्रम हत्याकांड: कैदी नंबर 395 साहिल और 396 मुस्कान ने बेचैनी में काटी रात, हाईकोर्ट में अपील की तैयारी
मौत की सजा सुनाए जाने के बाद जेल में बदली दिनचर्या, मुस्कान सिलाई-कढ़ाई और साहिल करेगा बागवानी का काम; बड़ी बेटी से मिलना चाहती है मुस्कान
मेरठ। देशभर में चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में अदालत द्वारा मौत की सजा सुनाए जाने के बाद हत्याकांड के दोषी साहिल और मुस्कान की जेल में दिनचर्या बदल गई है। अदालत के फैसले के बाद साहिल को कैदी नंबर 395 और मुस्कान को कैदी नंबर 396 के रूप में जाना जाएगा। सजा सुनाए जाने के बाद दोनों की पहली रात बेचैनी में गुजरी। जेल प्रशासन के मुताबिक, दोनों ने रात में खाना नहीं खाया और पूरी रात करवटें बदलते रहे।
जेलर वीरेश राज शर्मा के अनुसार, अदालत के फैसले के बाद दोनों की मानसिक स्थिति में बेचैनी दिखाई दी। वहीं, सौरभ राजपूत के परिजनों ने फैसले पर संतोष जताया। इस मामले में अदालत के फैसले के बाद अब आगे की कानूनी प्रक्रिया पर सबकी निगाहें टिकी हैं।
अलग-अलग बैरकों में रहेंगे साहिल और मुस्कान
मौत की सजा सुनाए जाने के बाद मुस्कान को बैरक नंबर 12बी और साहिल को बैरक नंबर 15 में रखा जाएगा। दोनों को अब सजायाफ्ता कैदियों के निर्धारित कपड़े पहनने होंगे। जानकारी के मुताबिक, मुस्कान क्रीम रंग की साड़ी या सूट पहनेगी, जबकि साहिल सफेद कुर्ता-पायजामा पहनेगा।
जेल में मुस्कान पहले की तरह सिलाई-कढ़ाई का काम करेगी, जबकि साहिल को बागवानी का काम सौंपे जाने की बात कही गई है। मुस्कान अपनी बड़ी बेटी से मिलना चाहती है। ऐसे में बेटी से उसकी मुलाकात को लेकर भी चर्चा है।
हाईकोर्ट में अपील करेंगे दोनों दोषी
अदालत से मौत की सजा मिलने के बाद साहिल और मुस्कान ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल करने की बात कही है। ऐसे मामलों में मृत्युदंड के फैसले के बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे की सुनवाई और आवश्यक न्यायिक मंजूरी महत्वपूर्ण होती है। इसलिए अदालत के फैसले के बाद भी मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।
मथुरा के महिला फांसीघर पर भी चर्चा
इस मामले में मथुरा की जेल का महिला फांसीघर भी चर्चा में है। उत्तर प्रदेश में मथुरा जेल को महिला फांसीघर के रूप में जाना जाता है। आजादी के बाद से यहां किसी महिला को फांसी दिए जाने का मामला सामने नहीं आया है। यदि भविष्य में मुस्कान को यहां फांसी दी जाती है, तो यह ऐतिहासिक घटना होगी। हालांकि, फिलहाल इस संबंध में किसी अंतिम निर्णय की पुष्टि नहीं की जा सकती।
गौरतलब है कि अमरोहा जिले के बावनखेड़ी में वर्ष 2008 में सात लोगों की हत्या के मामले में दोषी शबनम को भी मौत की सजा सुनाई गई थी। उसकी दया याचिका लंबित रहने के कारण अब तक उसकी फांसी नहीं हुई है।
नीला ड्रम हत्याकांड में मौत की सजा के फैसले के बाद साहिल और मुस्कान की जेल में बदली दिनचर्या और हाईकोर्ट में अपील की तैयारी ने मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। अब आगे की कानूनी प्रक्रिया पर सबकी नजर रहेगी।
नोट: प्रकाशन से पहले अदालत के फैसले, मृत्युदंड की स्थिति, जेल प्रशासन के बयानों और कैदियों के नंबरों से संबंधित तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि अवश्य कर लें।



